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mahabharat 13.49.55: वह भी उस धन को तभी ले सकता है जब उसका पिता उसे दे । यदि उसे धन न दिया जाए तो उसे लेने का कोई अधिकार नहीं है । तीनों वर्णों से उत्पन्न शूद्र धन देने में सर्वदा असमर्थ रहता है ॥55॥   |   mahabharat अध्याय 13.49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  13.49.55 
सोऽपि दत्तं हरेत् पित्रा नादत्तं हर्तुमर्हति।
त्रिभिर्वर्णै: सदा जात: शूद्रोऽदेयधनो भवेत् ॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
वह भी उस धन को तभी ले सकता है जब उसका पिता उसे दे । यदि उसे धन न दिया जाए तो उसे लेने का कोई अधिकार नहीं है । तीनों वर्णों से उत्पन्न शूद्र धन देने में सर्वदा असमर्थ रहता है ॥55॥
 
He too can take that wealth only if his father gives it to him. He has no right to take money if it is not given to him. A Shudra born from the three castes is always incapable of giving money. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)