श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.49.52 
वैश्यस्य वर्तमानस्य वैश्यायां भरतर्षभ।
शूद्रायां चापि कौन्तेय तयोर्विनियम: स्मृत:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! कुन्तीकुमार! यदि वैश्य और शूद्र दोनों के गर्भ से वैश्य का पुत्र उत्पन्न हो, तो उनके लिए भी धन-वितरण का एक ही नियम है ॥52॥
 
Bharatshrestha! Kuntikumar! If a Vaishya has a son from the womb of both a Vaishya and a Shudra, then there is the same rule of distribution of wealth for them also. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)