श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  13.49.47 
भीष्म उवाच
क्षत्रियस्यापि भार्ये द्वे विहिते कुरुनन्दन।
तृतीया च भवेच्छूद्रा न तु दृष्टान्तत: स्मृता॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - कुरुनन्दन! क्षत्रिय के लिए भी दो वर्णों की पत्नियाँ रखना शास्त्रों में विधि है। तीसरी शूद्रा भी उसकी पत्नी हो सकती है। परन्तु शास्त्रों में इसका समर्थन नहीं है। 47॥
 
Bhishmaji said – Kurunandan! Even for a Kshatriya, it is prescribed in the scriptures to have wives of two varnas. The third Shudra could also be his wife. But it is not supported by the scriptures. 47॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd