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श्लोक 13.49.46  |
युधिष्ठिर उवाच
उक्तं ते विधिवद् राजन् ब्राह्मणस्य पितामह।
इतरेषां तु वर्णानां कथं वै नियमो भवेत् ॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! आपने ब्राह्मणों के धन के बँटवारे की विधि तो बता दी। अब आप बताइए कि अन्य जातियों के धन के बँटवारे का क्या नियम होना चाहिए ?॥ 46॥ |
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| Yudhishthira asked - Grandfather! You have explained the method of dividing the wealth of Brahmins. Now tell me what should be the rule for dividing the wealth of other castes?॥ 46॥ |
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