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mahabharat 13.49.36: युधिष्ठिर! यदि कोई ब्राह्मण काम के वशीभूत होकर इस शास्त्रीय विधि के विपरीत आचरण करता है, तो वह ब्राह्मण चाण्डाल माना जाता है, जैसा कि पहले कहा जा चुका है ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 13.49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.49.36 
अथ चेदन्यथा कुर्याद् यदि कामाद् युधिष्ठिर।
यथा ब्राह्मण चाण्डाल: पूर्वदृष्टस्तथैव स:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! यदि कोई ब्राह्मण काम के वशीभूत होकर इस शास्त्रीय विधि के विपरीत आचरण करता है, तो वह ब्राह्मण चाण्डाल माना जाता है, जैसा कि पहले कहा जा चुका है ॥ 36॥
 
Yudhishthira! If a Brahmin, under the influence of lust, behaves contrary to this classical method, that Brahmin is considered a Chandala, as stated earlier. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)