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mahabharat 13.49.26: हे कुरुपुत्र! हे भरतवंशी राजा! पुत्री पुत्र के समान है - यही शास्त्रों का विधान है। इसी प्रकार धन-वितरण की भी यही धार्मिक व्यवस्था बताई गई है। इस प्रकार धर्म का चिन्तन और स्मरण करते हुए धन कमाओ और बचाओ। किन्तु उसे व्यर्थ न जाने दो - यज्ञ आदि करके उसे सफल बनाओ। 26।   |   mahabharat अध्याय 13.49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.49.26 
सा हि पुत्रसमा राजन् विहिता कुरुनन्दन।
एवमेव समुद्दिष्टो धर्मो वै भरतर्षभ।
एवं धर्ममनुस्मृत्य न वृथा साधयेद् धनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! हे भरतवंशी राजा! पुत्री पुत्र के समान है - यही शास्त्रों का विधान है। इसी प्रकार धन-वितरण की भी यही धार्मिक व्यवस्था बताई गई है। इस प्रकार धर्म का चिन्तन और स्मरण करते हुए धन कमाओ और बचाओ। किन्तु उसे व्यर्थ न जाने दो - यज्ञ आदि करके उसे सफल बनाओ। 26।
 
O son of Kuru! O King of Bharat's clan! A daughter is equal to a son - this is the law of scriptures. In this way, the same religious system of distribution of wealth has been described. In this way, while thinking and remembering the religion, earn and save wealth. But do not let it go waste - make it successful by performing yajnas and other yajnas. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)