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mahabharat 13.49.20: दया सबसे बड़ा गुण है। इसे समझकर ही धन में भाग दिया जाता है। जहाँ कहीं भी दया उत्पन्न होती है, वहाँ वह कल्याणकारी होती है॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 13.49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.49.20 
आनृशंस्यं परो धर्म इति तस्मै प्रदीयते।
यत्र तत्र समुत्पन्नं गुणायैवोपपद्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
दया सबसे बड़ा गुण है। इसे समझकर ही धन में भाग दिया जाता है। जहाँ कहीं भी दया उत्पन्न होती है, वहाँ वह कल्याणकारी होती है॥ 20॥
 
Kindness is the greatest virtue. Understanding this, one is given a share in wealth. Wherever kindness is born, it is beneficial.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)