vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन
»
श्लोक 14
श्लोक
13.49.14
वर्णे तृतीये जातस्तु वैश्यायां ब्राह्मणादपि।
द्विरंशस्तेन हर्तव्यो ब्राह्मणस्वाद् युधिष्ठिर॥ १४॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! ब्राह्मण के घर जो पुत्र उत्पन्न हो, वह वैश्य और तृतीय वर्ण की कन्या हो, उसे ब्राह्मण के धन का दो भाग मिलना चाहिए॥ 14॥
Yudhishthira! A son born to a Brahmin by a Vaishya, a daughter of the third caste, should get two parts of the Brahmin's wealth.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×