श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 48: स्त्रियोंके वस्त्राभूषणोंसे सत्कार करनेकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.48.3 
पितृभिर्भ्रातृभिश्चापि श्वशुरैरथ देवरै:।
पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणमीप्सुभि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पिता, भाई, ससुर और देवर जो अनेक प्रकार के कल्याण की इच्छा रखते हैं, उनके लिए उचित है कि वे नववधू का पूजन करें तथा उसे वस्त्र और आभूषणों से सम्मानित करें।
 
It is appropriate for the father, brother, father-in-law and brothers-in-law who desire various kinds of welfare to worship the new bride and honour her with clothes and ornaments. 3.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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