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श्लोक 13.48.15  |
श्रिय एता: स्त्रियो नाम सत्कार्या भूतिमिच्छता।
पालिता निगृहीता च श्री: स्त्री भवति भारत॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| भरतनंदन! स्त्रियाँ घर में धन की देवी हैं। उन्नति चाहने वाले पुरुष को उनका आदर करना चाहिए। उन्हें वश में रखकर और उनका ध्यान रखकर, स्त्री श्री (लक्ष्मी) का स्वरूप बन जाती है। |
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| Bharatanandan! Women are the goddess of wealth in the house. A man who wants to progress should respect them well. By keeping them under control and taking care of them, a woman becomes the embodiment of Shri (Lakshmi). |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विवाहधर्मे स्त्रीप्रशंसा नाम षट्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विवाहधर्मके प्रसंगमें स्त्रीकी प्रशंसानामक छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४६॥
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