श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 48: स्त्रियोंके वस्त्राभूषणोंसे सत्कार करनेकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.48.14 
पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने।
पुत्राश्च स्थाविरे भावे न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
किशोरावस्था में स्त्री की रक्षा उसका पिता करता है, युवावस्था में उसका पति उसका रक्षक होता है और वृद्धावस्था में उसके पुत्र उसकी रक्षा करते हैं। इसलिए स्त्री को कभी भी स्वतंत्र नहीं बनाना चाहिए॥14॥
 
In adolescence a woman is protected by her father, in youth her husband is her protector and in old age her sons protect her. Therefore a woman should never be made independent.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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