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श्लोक 13.48.12-13  |
विदेहराजदुहिता चात्र श्लोकमगायत॥ १२॥
नास्ति यज्ञक्रिया काचिन्न श्राद्धं नोपवासकम्।
धर्म: स्वभर्तृशुश्रूषा तया स्वर्गं जयन्त्युत॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| (स्त्रियों के कर्तव्यों के विषय में) विदेहराज जनक की पुत्री ने एक श्लोक गाया है, जिसका सार इस प्रकार है - स्त्रियों के लिए कोई यज्ञ, श्राद्ध या व्रत करना आवश्यक नहीं है। उसका कर्तव्य अपने पति की सेवा करना है। ऐसा करके स्त्रियाँ स्वर्ग को जीत लेती हैं।॥12-13॥ |
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| (Regarding the duties of women) The daughter of Videharaj Janaka has sung a verse, the gist of which is as follows - It is not necessary for a woman to perform any yajna, shraadh or fasting. Her duty is to serve her husband. By that, women conquer the heaven.॥ 12-13॥ |
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