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mahabharat 13.48.11-12h: संतान को जन्म देना, उसका पालन-पोषण करना तथा सुखपूर्वक जीवन-यात्रा करना - ये सब स्त्रियों के वश में हैं। यदि तुम स्त्रियों का सम्मान करोगे, तो तुम्हारे सभी कार्य सिद्ध हो जाएँगे।'॥11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.48: स्त्रियोंके वस्त्राभूषणोंसे सत्कार करनेकी आवश्यकताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 48: स्त्रियोंके वस्त्राभूषणोंसे सत्कार करनेकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  13.48.11-12h 
उत्पादनमपत्यस्य जातस्य परिपालनम्।
प्रीत्यर्थं लोकयात्राया: पश्यत स्त्रीनिबन्धनम्॥ ११॥
सम्मान्यमानाश्चैता हि सर्वकार्याण्यवाप्स्यथ।
 
 
अनुवाद
संतान को जन्म देना, उसका पालन-पोषण करना तथा सुखपूर्वक जीवन-यात्रा करना - ये सब स्त्रियों के वश में हैं। यदि तुम स्त्रियों का सम्मान करोगे, तो तुम्हारे सभी कार्य सिद्ध हो जाएँगे।'॥11 1/2॥
 
‘Giving birth to a child, taking care of the child and happily carrying on the journey of life – all these are under the control of women. If you respect women, then all your tasks will be accomplished.'॥ 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)