Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.47.8: स्त्रियाँ सदैव अपने पिता, पति या पुत्रों के संरक्षण में रहती हैं और कभी स्वतंत्र नहीं होतीं। यह प्राचीन धर्म है। इस धर्म का खंडन करना अधर्म या राक्षसी धर्म है। हमने कभी नहीं सुना कि प्राचीन काल में विवाह के अवसर पर पुरनियों ने इस राक्षसी प्रथा को अपनाया हो ॥8॥ | mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असदेव हि धर्मस्य प्रदानं धर्म आसुर:।
नानुशुश्रुम जात्वेतामिमां पूर्वेषु कर्मसु॥ ८॥
अनुवाद
स्त्रियाँ सदैव अपने पिता, पति या पुत्रों के संरक्षण में रहती हैं और कभी स्वतंत्र नहीं होतीं। यह प्राचीन धर्म है। इस धर्म का खंडन करना अधर्म या राक्षसी धर्म है। हमने कभी नहीं सुना कि प्राचीन काल में विवाह के अवसर पर पुरनियों ने इस राक्षसी प्रथा को अपनाया हो ॥8॥
Women always live under the protection of their father, husband or sons and are never independent. This is an ancient Dharma. To refute this Dharma is an unrighteous deed or a demoniac Dharma. We have never heard of this demoniac practice being adopted by the elders of the past on the occasion of marriage. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥