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mahabharat 13.47.7: दुष्टों का मार्ग शास्त्रों द्वारा कैसे स्वीकृत हो सकता है? सज्जनों के समक्ष इस विषय में प्रश्न, शंका या शिकायत कैसे की जा सकती है?॥7॥   |   mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.47.7 
असदाचरिते मार्गे कथं स्यादनुकीर्तनम्।
अत्र प्रश्न: संशयो वा सतामेवमुपालभेत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दुष्टों का मार्ग शास्त्रों द्वारा कैसे स्वीकृत हो सकता है? सज्जनों के समक्ष इस विषय में प्रश्न, शंका या शिकायत कैसे की जा सकती है?॥7॥
 
How can the path of the wicked be approved by the scriptures? How can questions, doubts or complaints be raised before the virtuous in this matter?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)