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mahabharat 13.47.4: सावित्री ने अपने पिता से अनुमति लेकर अपनी इच्छा से पति के साथ सहवास किया था। अन्य धार्मिक पुरुष उसके इस कृत्य की प्रशंसा करते हैं; परन्तु कुछ लोग नहीं करते ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.47.4 
स्वयंवृत्तेन साऽऽज्ञप्ता पित्रा वै प्रत्यपद्यत।
तत् तस्यान्ये प्रशंसन्ति धर्मज्ञा नेतरे जना:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सावित्री ने अपने पिता से अनुमति लेकर अपनी इच्छा से पति के साथ सहवास किया था। अन्य धार्मिक पुरुष उसके इस कृत्य की प्रशंसा करते हैं; परन्तु कुछ लोग नहीं करते ॥4॥
 
Savitri had taken permission from her father and had a relationship with the husband of her own choice. Other religious men praise her act; but some people do not. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)