Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.47.3: कन्या को अपने प्रिय पति के लिए किसी भी प्रकार से संतान प्राप्ति की इच्छा करनी चाहिए। अतः कोई अन्य पुरुष उससे विवाह नहीं कर सकता या वैदिक मंत्रों से कोई अन्य कार्य नहीं कर सकता।॥3॥ | mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्यार्थेऽपत्यमीहेत येन न्यायेन शक्नुयात्।
न तस्मान्मन्त्रवत्कार्यं कश्चित् कुर्वीत किंचन॥ ३॥
अनुवाद
कन्या को अपने प्रिय पति के लिए किसी भी प्रकार से संतान प्राप्ति की इच्छा करनी चाहिए। अतः कोई अन्य पुरुष उससे विवाह नहीं कर सकता या वैदिक मंत्रों से कोई अन्य कार्य नहीं कर सकता।॥3॥
The girl should desire to have a child for her valued husband by whatever just means possible. Hence no other man can marry her or do any other act with the Vedic mantras.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥