Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.47.18-19: जो मनुष्य धन प्राप्ति के लिए अपने पुत्र को बेच देता है, अथवा जीविका चलाने के लिए धन के लिए अपनी पुत्री को बेच देता है, वह मूर्ख कुम्भीपाक आदि सात नरकों से भी बदतर कालसूत्र नामक नरक में गिरता है और अपना ही मूत्र, मल और पसीना खाता है।॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो मनुष्य: स्वकं पुत्रं विक्रीय धनमिच्छति।
कन्यां वा जीवितार्थाय य: शुल्केन प्रयच्छति॥ १८॥
सप्तावरे महाघोरे निरये कालसाह्वये।
स्वेदं मूत्रं पुरीषं च तस्मिन् मूढ: समश्नुते॥ १९॥
अनुवाद
जो मनुष्य धन प्राप्ति के लिए अपने पुत्र को बेच देता है, अथवा जीविका चलाने के लिए धन के लिए अपनी पुत्री को बेच देता है, वह मूर्ख कुम्भीपाक आदि सात नरकों से भी बदतर कालसूत्र नामक नरक में गिरता है और अपना ही मूत्र, मल और पसीना खाता है।॥18-19॥
A person who sells his son to gain wealth, or sells his daughter for money to earn a living, that fool falls into the hell called Kalasutra which is worse than the seven hells like Kumbhipak etc., and eats his own urine, feces and sweat.'॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥