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mahabharat 13.47.15: धन के लिए बेची गई पुत्रियों से उत्पन्न पुत्र केवल अपने पिता के ही उत्तराधिकारी होते हैं। दादा-दादी के कर्तव्य के अनुसार उन्हें दादा की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनाने का कोई युक्तिसंगत कारण मुझे नहीं दिखाई देता।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.47.15 
दौहित्रकेण धर्मेण नात्र पश्यामि कारणम्।
विक्रीतासु हि ये पुत्रा भवन्ति पितुरेव ते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
धन के लिए बेची गई पुत्रियों से उत्पन्न पुत्र केवल अपने पिता के ही उत्तराधिकारी होते हैं। दादा-दादी के कर्तव्य के अनुसार उन्हें दादा की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनाने का कोई युक्तिसंगत कारण मुझे नहीं दिखाई देता।॥15॥
 
The sons born from daughters who have been sold for money are heirs only to their father. I do not see any logical reason for making them heirs to their grandfather's wealth according to the duty of a grandparent.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)