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mahabharat 13.47.10: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! पिता के लिए पुत्री भी पुत्र के समान होती है; फिर उसके रहते केवल पुरुष ही धन का अधिकारी कैसे हो सकता है?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 47: कन्याके विवाहका तथा कन्या और दौहित्र आदिके उत्तराधिकारका विचार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.47.10 
युधिष्ठिर उवाच
अथ केन प्रमाणेन पुंसामादीयते धनम्।
पुत्रवद्धि पितुस्तस्य कन्या भवितुमर्हति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! पिता के लिए पुत्री भी पुत्र के समान होती है; फिर उसके रहते केवल पुरुष ही धन का अधिकारी कैसे हो सकता है?॥10॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! For a father a daughter is also like a son; then in her presence how can only men be entitled to wealth?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)