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mahabharat 13.46.7: हे मनुष्यों के स्वामी! जब कोई कन्या अपने बन्धु-बान्धवों को बहला-फुसलाकर और उन्हें बहुत-सा धन देकर खरीद ली जाती है, तब बुद्धिमान लोग उसे असुर-विवाह कहते हैं॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.46.7 
धनेन बहुधा क्रीत्वा सम्प्रलोभ्य च बान्धवान्।
असुराणां नृपैतं वै धर्ममाहुर्मनीषिण:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जब कोई कन्या अपने बन्धु-बान्धवों को बहला-फुसलाकर और उन्हें बहुत-सा धन देकर खरीद ली जाती है, तब बुद्धिमान लोग उसे असुर-विवाह कहते हैं॥ 7॥
 
O Lord of men! When a girl is bought by luring her relatives and friends and giving them a lot of money, the wise call this the religion of the demons (asura vivaah).॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)