जो पत्नी योग्य हो, अपने कुल के अनुसार हो, पिता, माता या भाई द्वारा दी गई हो और प्रज्वलित अग्नि के पास बैठी हो, ऐसी पत्नी को श्रेष्ठ ब्राह्मण को अग्नि की परिक्रमा करके तथा शास्त्रविधि के अनुसार स्वीकार करना चाहिए॥ 56॥
A wife who is suitable, matching one's lineage, given by one's father, mother or brother and is sitting near a blazing fire, a noble Brahmin should accept such a wife after circumambulating the fire and in accordance with the injunctions of the scriptures.॥ 56॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विवाहधर्मकथने चतुश्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विवाहधर्मका वर्णनविषयक चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)