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mahabharat 13.46.55: ‘सप्तपदी के सातवें चरण में विवाह में हाथ डालने के मंत्र सफल होते हैं (और तभी पति-पत्नी का संबंध निश्चित होता है)। जिस पुरुष को जल से संकल्प लेकर कन्या दान में दी जाती है, वही उसका पति है और वह उसकी पत्नी मानी जाती है। विद्वान पुरुष कन्यादान की विधि इस प्रकार बताते हैं। वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं ॥ 55॥   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  13.46.55 
पाणिग्रहणमन्त्राणां निष्ठा स्यात् सप्तमे पदे।
पाणिग्रहस्य भार्या स्याद् यस्य चाद्भि: प्रदीयते।
इति देयं वदन्त्यत्र त एनं निश्चयं विदु:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
‘सप्तपदी के सातवें चरण में विवाह में हाथ डालने के मंत्र सफल होते हैं (और तभी पति-पत्नी का संबंध निश्चित होता है)। जिस पुरुष को जल से संकल्प लेकर कन्या दान में दी जाती है, वही उसका पति है और वह उसकी पत्नी मानी जाती है। विद्वान पुरुष कन्यादान की विधि इस प्रकार बताते हैं। वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं ॥ 55॥
 
‘In the seventh step of Saptapadi, the mantras of taking the hand in marriage are successful (and only then the relationship of husband and wife is decided). The man to whom the daughter is given in charity after taking a vow with water, he is her husband and she is considered his wife. Learned men explain the method of Kanyadan in this manner. They have arrived at this conclusion. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)