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mahabharat 13.46.53-54: ‘कुछ लोगों के मत से अविवाहित कन्या को स्वीकार करने का अधिकार है। दूसरों के मत से यह दुष्ट प्रवृत्ति है - अवैधानिक कृत्य है। इस प्रकार तर्क करने वाले लोग अन्ततः इसी निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि कन्या के विवाह से पूर्व विवाह संस्कार और मन्त्र-संस्कार हो जाने पर भी यदि कोई अंतराल या व्यवधान आ जाए; अर्थात् यदि अयोग्य वर को छोड़कर अन्य योग्य वर से कन्या का विवाह कर दिया जाए, तो देने वाले को केवल झूठ बोलने का पाप लगता है (कन्या का विवाह होने से पूर्व विवाहित नहीं माना जाता)।॥ 53-54॥   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  13.46.53-54 
लिखन्त्येव तु केषांचिदपरेषां शनैरपि।
इति ये संवदन्त्यत्र त एतं निश्चयं विदु:॥ ५३॥
तत्पाणिग्रहणात् पूर्वमन्तरं यत्र वर्तते।
सर्वमङ्गलमन्त्रं वै मृषावादस्तु पातक:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
‘कुछ लोगों के मत से अविवाहित कन्या को स्वीकार करने का अधिकार है। दूसरों के मत से यह दुष्ट प्रवृत्ति है - अवैधानिक कृत्य है। इस प्रकार तर्क करने वाले लोग अन्ततः इसी निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि कन्या के विवाह से पूर्व विवाह संस्कार और मन्त्र-संस्कार हो जाने पर भी यदि कोई अंतराल या व्यवधान आ जाए; अर्थात् यदि अयोग्य वर को छोड़कर अन्य योग्य वर से कन्या का विवाह कर दिया जाए, तो देने वाले को केवल झूठ बोलने का पाप लगता है (कन्या का विवाह होने से पूर्व विवाहित नहीं माना जाता)।॥ 53-54॥
 
‘In the opinion of some, one has the right to accept an unmarried girl. In the opinion of others, this is a wicked tendency – an illegal act. Those who argue in this manner, ultimately reach this conclusion that even after the marriage rituals and mantras have been performed before the marriage of the girl, if there is a gap or interruption; i.e. if the girl is married to some other eligible groom leaving the unworthy groom, then the giver only incurs the sin of lying (before the marriage of the girl is not considered married).॥ 53-54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)