Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.46.5-6: युधिष्ठिर! जब किसी कन्या के माता-पिता अपने द्वारा चुने हुए वर के स्थान पर उसकी अपनी पसंद के वर का विवाह उसकी अपनी पसंद के तथा उससे प्रेम करने वाले वर से कर देते हैं, तब वेदों को जानने वाला मनुष्य उस विवाह को गंधर्व धर्म कहता है। | mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आत्माभिप्रेतमुत्सृज्य कन्याभिप्रेत एव य:॥ ५॥
अभिप्रेता च या यस्य तस्मै देया युधिष्ठिर।
गान्धर्वमिति तं धर्मं प्राहुर्वेदविदो जना:॥ ६॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! जब किसी कन्या के माता-पिता अपने द्वारा चुने हुए वर के स्थान पर उसकी अपनी पसंद के वर का विवाह उसकी अपनी पसंद के तथा उससे प्रेम करने वाले वर से कर देते हैं, तब वेदों को जानने वाला मनुष्य उस विवाह को गंधर्व धर्म कहता है।
Yudhishthira! When the parents of a girl marry a groom of her own choice instead of the groom chosen by them, to a groom of her own choice and who loves her, then a person well versed with Vedas calls that marriage as Gandharva Dharma (Gandharva marriage).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥