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mahabharat 13.46.43: यदि आपके मत में विवाह का निर्णय केवल मूल्य चुकाने से होता है, न कि हाथ जोड़कर विवाह करने से, तो स्मृति का यह कथन कि कन्या का पिता एक वर से शुल्क लेकर भी दूसरे गुणवान वर का आश्रय ले सकता है, निरर्थक होगा। अर्थात् वह अपनी कन्या का विवाह पहले वाले वर को छोड़कर दूसरे गुणवान वर से कर सकता है।'   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  13.46.43 
यदि व: शुल्कतो निष्ठा न पाणिग्रहणात् तथा।
लाजान्तरमुपासीत प्राप्तशुल्क इति स्मृति:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
यदि आपके मत में विवाह का निर्णय केवल मूल्य चुकाने से होता है, न कि हाथ जोड़कर विवाह करने से, तो स्मृति का यह कथन कि कन्या का पिता एक वर से शुल्क लेकर भी दूसरे गुणवान वर का आश्रय ले सकता है, निरर्थक होगा। अर्थात् वह अपनी कन्या का विवाह पहले वाले वर को छोड़कर दूसरे गुणवान वर से कर सकता है।'
 
‘If in your opinion, the marriage is decided only by paying the price, and not by taking the hand in marriage, then the statement of the Smriti that the father of the girl can take shelter of another talented groom even after taking the fee from one groom will be meaningless. That is, he can marry his daughter to another talented groom leaving the first one.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)