Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.46.39-40: उनमें से एक कन्या अम्बा पहले ही शाल्वराज को अपना विवाह कर चुकी थी; अर्थात् वह मन ही मन उन्हें पति रूप में स्वीकार कर चुकी थी। अन्य (दोनों कन्याओं) के लिए काशी नरेश ने शुल्क प्राप्त कर लिया था। अतः मेरे पिता (चाचा) कुरुवंशी बाह्लीक ने वहीं कहा, 'जो कन्या पहले से ही विवाहित है, उसे त्याग दो और दूसरी कन्या (जिसके लिए केवल शुल्क लिया गया है) से विवाह करो।' मुझे अपने चाचा के इस कथन पर संदेह हुआ, इसलिए मैंने दूसरों से इसके बारे में पूछा। 39-40. | mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गृहीतपाणिरेकाऽऽसीत् प्राप्तशुल्का पराभवत्।
कन्या गृहीता तत्रैव विसर्ज्या इति मे पिता॥ ३९॥
अब्रवीदितरां कन्यामावहेति स कौरव:।
अप्यन्याननुपप्रच्छ शङ्कमान: पितुर्वच:॥ ४०॥
अनुवाद
उनमें से एक कन्या अम्बा पहले ही शाल्वराज को अपना विवाह कर चुकी थी; अर्थात् वह मन ही मन उन्हें पति रूप में स्वीकार कर चुकी थी। अन्य (दोनों कन्याओं) के लिए काशी नरेश ने शुल्क प्राप्त कर लिया था। अतः मेरे पिता (चाचा) कुरुवंशी बाह्लीक ने वहीं कहा, 'जो कन्या पहले से ही विवाहित है, उसे त्याग दो और दूसरी कन्या (जिसके लिए केवल शुल्क लिया गया है) से विवाह करो।' मुझे अपने चाचा के इस कथन पर संदेह हुआ, इसलिए मैंने दूसरों से इसके बारे में पूछा। 39-40.
One of the daughters, Amba, had already given her hand to Shalvaraj; that is, she had already accepted him as her husband in her heart. For the other (two daughters) the King of Kashi had received the fee. Therefore my father (uncle) Bahlika, a Kuru descendant, said there itself, 'Abandon the daughter who has already been married and marry the other daughter (for whom only the fee has been taken).' I had doubts about this statement of my uncle, so I asked others about it. 39-40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥