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mahabharat 13.46.32: कन्या के भाई और सम्बन्धी किसी से तभी मूल्य मांगते हैं जब वह विपरीत गुण (वृद्ध आदि) से युक्त हो। यदि वर को बुलाकर कहा जाए कि, 'तुम मेरी कन्या को आभूषणों से अलंकृत करके उससे विवाह करो' और ऐसा कहकर वह उसे आभूषण देकर विवाह कर ले, तो यह धर्म के अनुकूल है॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.46.32 
अन्यैर्गुणैरुपेतं तु शुल्कं याचन्ति बान्धवा:।
अलंकृत्वा वहस्वेति यो दद्यादनुकूलत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
कन्या के भाई और सम्बन्धी किसी से तभी मूल्य मांगते हैं जब वह विपरीत गुण (वृद्ध आदि) से युक्त हो। यदि वर को बुलाकर कहा जाए कि, 'तुम मेरी कन्या को आभूषणों से अलंकृत करके उससे विवाह करो' और ऐसा कहकर वह उसे आभूषण देकर विवाह कर ले, तो यह धर्म के अनुकूल है॥ 32॥
 
The girl's brothers and relatives ask for a price from someone only when he is endowed with the opposite quality (advanced age etc.). If the groom is called and told, 'You adorn my daughter with ornaments and marry her' and after saying so he gives her ornaments and marries her, then it is in accordance with Dharma.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)