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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.46.3 
भीष्म उवाच
शीलवृत्ते समाज्ञाय विद्यां योनिं च कर्म च।
सद्भिरेवं प्रदातव्या कन्या गुणयुते वरे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी ने कहा - बेटा! सज्जन पुरुषों को चाहिए कि पहले वर के चरित्र, स्वभाव, सदाचार, ज्ञान, कुल, मर्यादा और क्रियाकलापों की परीक्षा कर लें। फिर यदि वह सब प्रकार से गुणवान दिखाई दे, तो उसे कन्या दे दें।
 
Bhishmaji said - Son! Good men should first examine the character, nature, good conduct, knowledge, family, dignity and activities of the groom. Then if he appears to be virtuous in all aspects, then they should give the girl to him. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)