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mahabharat 13.46.28: युधिष्ठिर ने पूछा - "पितामह! यदि किसी वर के साथ कन्या का विवाह निश्चित हो गया हो और उसका मूल्य तय हो गया हो, और बाद में उससे भी अधिक योग्य, धर्म, धन और योनि वाला वर मिल जाए, तो जिससे मूल्य लिया गया हो, उससे झूठ बोलकर उसे कन्या देने से मना कर देना चाहिए या नहीं?" ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.46.28 
युधिष्ठिर उवाच
कन्यायां प्राप्तशुल्कायां ज्यायांश्चेदाव्रजेद् वर:।
धर्मकामार्थसम्पन्नो वाच्यमत्रानृतं न वा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - "पितामह! यदि किसी वर के साथ कन्या का विवाह निश्चित हो गया हो और उसका मूल्य तय हो गया हो, और बाद में उससे भी अधिक योग्य, धर्म, धन और योनि वाला वर मिल जाए, तो जिससे मूल्य लिया गया हो, उससे झूठ बोलकर उसे कन्या देने से मना कर देना चाहिए या नहीं?" ॥28॥
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! If a daughter's marriage has been fixed with a groom and her price has been taken, and later on a more suitable groom with better Dharma, wealth and sex than him is found, should one lie to the one from whom the price was taken and refuse to give the daughter to him or not?" ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)