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mahabharat 13.46.26: साथ ही पति-पत्नी द्वारा परस्पर मंत्रोच्चार के पश्चात् ली गई प्रतिज्ञाएँ भी श्रेष्ठ मानी जाती हैं और यदि उसे सगे-संबंधियों का समर्थन प्राप्त हो तो और भी उत्तम है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.46.26 
यस्त्वत्र मन्त्रसमयो भार्यापत्योर्मिथ: कृत:।
तमेवाहुर्गरीयांसं यश्चासौ ज्ञातिभि: कृत:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
साथ ही पति-पत्नी द्वारा परस्पर मंत्रोच्चार के पश्चात् ली गई प्रतिज्ञाएँ भी श्रेष्ठ मानी जाती हैं और यदि उसे सगे-संबंधियों का समर्थन प्राप्त हो तो और भी उत्तम है॥ 26॥
 
Also the vows taken by husband and wife after mutual chanting of mantras are considered the best and if it is supported by relatives then it is even better.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)