Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.46.24: भरत! यदि कन्या को उसके भाई-बन्धु किसी धार्मिक अनुष्ठान में दान में दे दें या धन के बदले दे दें, तो यदि उसे धार्मिक रीति से विवाह करने वाला या धन से खरीदने वाला व्यक्ति अपने घर ले जाए, तो उसमें किसी प्रकार का कोई दोष नहीं है। ऐसी स्थिति में दोष कैसे हो सकता है?॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत! यदि कन्या को उसके भाई-बन्धु किसी धार्मिक अनुष्ठान में दान में दे दें या धन के बदले दे दें, तो यदि उसे धार्मिक रीति से विवाह करने वाला या धन से खरीदने वाला व्यक्ति अपने घर ले जाए, तो उसमें किसी प्रकार का कोई दोष नहीं है। ऐसी स्थिति में दोष कैसे हो सकता है?॥ 24॥
Bharata! If the girl is given in charity by the brothers and relatives of the girl in a religious ceremony or is given away in exchange for money, then if the person who marries her in a religious manner or purchases her for money takes her home, then there is no fault of any kind. How can there be any fault in that situation?॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥