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mahabharat 13.46.22: यदि पत्नी, पति, ऋत्विज, आचार्य, शिष्य और उपाध्याय उपर्युक्त व्यवस्था के विरुद्ध झूठ बोलते हैं, तो वे दण्ड के भागी होते हैं। परन्तु अन्य लोग उन्हें दण्ड के योग्य नहीं समझते ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.46.22 
भार्यापत्यृत्विगाचार्या: शिष्योपाध्याय एव च।
मृषोक्ते दण्डमर्हन्ति नेत्याहुरपरे जना:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यदि पत्नी, पति, ऋत्विज, आचार्य, शिष्य और उपाध्याय उपर्युक्त व्यवस्था के विरुद्ध झूठ बोलते हैं, तो वे दण्ड के भागी होते हैं। परन्तु अन्य लोग उन्हें दण्ड के योग्य नहीं समझते ॥22॥
 
If the wife, husband, Ritwij, Acharya, disciple and Upadhyaya tell a lie against the above mentioned system, they are liable to be punished. But others do not consider them worthy of punishment. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)