श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.46.15 
यस्यास्तु न भवेद् भ्राता पिता वा भरतर्षभ।
नोपयच्छेत तां जातु पुत्रिकाधर्मिणी हि सा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! जिस कन्या का पिता या भाई न हो, उससे कभी विवाह नहीं करना चाहिए; क्योंकि वह पुत्रवधू मानी जाती है।
 
Bharatshrestha! One should never marry a girl who does not have a father or brother; Because she is considered to be a daughter-in-law. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)