Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.46.10: नरश्रेष्ठ! ब्राह्मण, क्षत्र (प्रजापत्य) और गंधर्व- ये तीन विवाह धर्मानुकूल कहे गए हैं। ये विवाह चाहे अलग-अलग हों या अन्य विवाहों के साथ मिश्रित हों, ये करने योग्य हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है। 10॥ | mahabharat अध्याय 13.46: कन्या-विवाहके सम्बन्धमें पात्रविषयक विभिन्न विचार । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्म: क्षात्रोऽथ गान्धर्व एते धर्म्या नरर्षभ।
पृथग् वा यदि वा मिश्रा: कर्तव्या नात्र संशय:॥ १०॥
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! ब्राह्मण, क्षत्र (प्रजापत्य) और गंधर्व- ये तीन विवाह धर्मानुकूल कहे गए हैं। ये विवाह चाहे अलग-अलग हों या अन्य विवाहों के साथ मिश्रित हों, ये करने योग्य हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है। 10॥
Narashrestha! Brahmin, Kshatra (Prajapatya) and Gandharva – these three marriages are said to be religious. Whether these are separate or mixed with other marriages, they are worthy of being done. There is no doubt in it. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥