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mahabharat 13.45.9: तुम्हें हर्ष और गर्व से परिपूर्ण देखकर वे मनुष्य तुम्हारे पापों को गुरु से कहने के स्थान पर तुम्हें तुम्हारे कर्मों का स्मरण करा रहे थे और वही बातें कह रहे थे जो तुमने अपने कानों से सुनी थीं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.45.9 
ते त्वां हर्षस्मितं दृष्ट्वा गुरो: कर्मानिवेदकम्।
स्मारयन्तस्तथा प्राहुस्ते यथा श्रुतवान् भवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें हर्ष और गर्व से परिपूर्ण देखकर वे मनुष्य तुम्हारे पापों को गुरु से कहने के स्थान पर तुम्हें तुम्हारे कर्मों का स्मरण करा रहे थे और वही बातें कह रहे थे जो तुमने अपने कानों से सुनी थीं॥9॥
 
Seeing you filled with joy and pride, instead of telling your Guru about your sins, those men were reminding you of your deeds and saying the same things that you had heard with your own ears.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)