श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.45.3 
विपुल उवाच
ब्रह्मर्षे मिथुनं किं तत् के च ते पुरुषा विभो।
ये मां जानन्ति तत्त्वेन यन्मां त्वं परिपृच्छसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
विपुल ने कहा - ब्रह्मर्षि! मैंने जो युगल देखा था, वह कौन था? तथा वे छः पुरुष कौन थे, जो मुझे अच्छी तरह जानते थे और जिनके विषय में आप मुझसे पूछ रहे हैं?॥3॥
 
Vipul said - Brahmarshi! Who was that couple that I saw? And who were those six men who knew me well and about whom you are asking me?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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