श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.45.27 
तेनैकेन तु रक्षा वै विपुलेन कृता स्त्रिया:।
नान्य: शक्तस्त्रिलोकेऽस्मिन् रक्षितुं नृप योषितम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! विपुल ही एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिन्होंने उस स्त्री की रक्षा की थी। तीनों लोकों में कोई दूसरा पुरुष नहीं है जो इस प्रकार युवतियों की रक्षा कर सके॥ 27॥
 
O Lord of men! Vipul was the only one who protected the woman. There is no other man in the three worlds who can protect young women in this manner.॥ 27॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विपुलोपाख्याने त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४३॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विपुलका उपाख्यानविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल २९ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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