श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.45.23 
एता हि मनुजव्याघ्र तीक्ष्णास्तीक्ष्णपराक्रमा:।
नासामस्ति प्रियो नाम मैथुने सङ्गमेति य:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषों! ये स्त्रियाँ तीव्र स्वभाव वाली और असह्य बल वाली हैं। कोई भी पुरुष इनका प्रिय नहीं है। जो इनका मैथुनकाल में साथ देता है, वही इनका प्रिय है॥ 23॥
 
O men! These women have a sharp temper and unbearable strength. No man is their favourite. The one who supports them during sexual intercourse is their favourite for that very time.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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