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mahabharat 13.45.21: परन्तु दुष्ट और अनैतिक स्त्रियाँ कुल का नाश करने वाली होती हैं, उनका मन सदैव पाप से भरा रहता है। हे पुरुषों के स्वामी! ऐसी स्त्रियों की पहचान उनके शरीर पर विकसित होने वाले दुर्गुणों से की जा सकती है।   |   mahabharat अध्याय 13.45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.45.21 
असाध्व्यश्चापि दुर्वृत्ता: कुलघ्ना: पापनिश्चया:।
विज्ञेया लक्षणैर्दुष्टै: स्वगात्रसहजैर्नृप॥ २१॥
 
 
अनुवाद
परन्तु दुष्ट और अनैतिक स्त्रियाँ कुल का नाश करने वाली होती हैं, उनका मन सदैव पाप से भरा रहता है। हे पुरुषों के स्वामी! ऐसी स्त्रियों की पहचान उनके शरीर पर विकसित होने वाले दुर्गुणों से की जा सकती है।
 
But wicked and immoral women are the destroyers of the family, their minds are always full of sin. O Lord of men! Then such women can be identified by the bad characteristics that develop on their bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)