Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.45.2: देवशर्मा ने पूछा- हे प्रिय शिष्य विपुल! उस महान वन में तुमने क्या देखा? वे लोग तुम्हें जानते हैं। उन्हें तुम्हारी आत्मा का तथा मेरी पत्नी रुचि का भी पूर्ण ज्ञान है॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 13.45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवशर्मोवाच
किं ते विपुल दृष्टं वै तस्मिन् शिष्य महावने।
ते त्वां जानन्ति विपुल आत्मा च रुचिरेव च॥ २॥
अनुवाद
देवशर्मा ने पूछा- हे प्रिय शिष्य विपुल! उस महान वन में तुमने क्या देखा? वे लोग तुम्हें जानते हैं। उन्हें तुम्हारी आत्मा का तथा मेरी पत्नी रुचि का भी पूर्ण ज्ञान है॥ 2॥
Dev Sharma asked- My dear disciple Vipul! What did you see in that great forest? Those people know you. They have complete knowledge of your soul and also of my wife Ruchi.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥