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mahabharat 13.45.19: इसलिए हे कुन्तीपुत्र! मैं तुमसे कहता हूँ कि तुम सदैव स्त्रियों की रक्षा करो। स्त्रियों में अच्छे और बुरे दोनों ही गुण सदैव देखे जाते हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.45.19 
तस्माद्‍ब्रवीमि पार्थ त्वां स्त्रियो रक्ष्या: सदैव च।
उभयं दृश्यते तासु सततं साध्वसाधु च॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे कुन्तीपुत्र! मैं तुमसे कहता हूँ कि तुम सदैव स्त्रियों की रक्षा करो। स्त्रियों में अच्छे और बुरे दोनों ही गुण सदैव देखे जाते हैं॥19॥
 
Therefore, Kunti's son, I tell you that you should always protect women. Both good and bad things are always seen in women.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)