Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.45.15: स्त्रियाँ पुरुषों में आसक्त होती हैं और पुरुषों में भी इस विषय में यही भावना होती है। यदि तुम्हारी भावना उसकी रक्षा के विरुद्ध होती, तो तुम्हें अवश्य ही शाप मिलता और मैं भी तुम्हें शाप देने का विचार अवश्य करता॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.45.15 
सज्जन्ति पुरुषे नार्य: पुंसां सोऽर्थश्च पुष्कल:।
अन्यथारक्षत: शापोऽभविष्यत् ते मतिश्च मे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियाँ पुरुषों में आसक्त होती हैं और पुरुषों में भी इस विषय में यही भावना होती है। यदि तुम्हारी भावना उसकी रक्षा के विरुद्ध होती, तो तुम्हें अवश्य ही शाप मिलता और मैं भी तुम्हें शाप देने का विचार अवश्य करता॥15॥
 
Women get attached to men and men also have the same feeling in this regard. If your feeling was against protecting her, you would have definitely received a curse and I would have definitely thought of cursing you.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)