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mahabharat 13.45.11: हे ब्रह्मन्! तुमने मुझसे अपने उन कर्मों को नहीं कहा जो व्यभिचार के पाप के कारण भयंकर थे। वे उसे जानते थे, इसलिए उन्होंने तुम्हें बताया।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 45: देवशर्माका विपुलको निर्दोष बताकर समझाना और भीष्मका युधिष्ठिरको स्त्रियोंकी रक्षाके लिये आदेश देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.45.11 
तत् त्वया मम यत् कर्म व्यभिचाराद् भयात्मकम्।
नाख्यातमिति जानन्तस्ते त्वामाहुस्तथा द्विज॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! तुमने मुझसे अपने उन कर्मों को नहीं कहा जो व्यभिचार के पाप के कारण भयंकर थे। वे उसे जानते थे, इसलिए उन्होंने तुम्हें बताया।॥11॥
 
O Brahman! You did not tell me about your deeds which were fearful due to the sin of adultery. They knew about it, so they told you. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)