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mahabharat 13.44.9: उन दिव्य पुष्पों को अपने केशों में गूँथकर सुन्दरी रुचि निमंत्रण पाकर अंगराज के घर गई।   |   mahabharat अध्याय 13.44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.44.9 
पिनह्य तानि पुष्पाणि केशेषु वरवर्णिनी।
आमन्त्रिता ततोऽगच्छद् रुचिरङ्गपतेर्गृहम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन दिव्य पुष्पों को अपने केशों में गूँथकर सुन्दरी रुचि निमंत्रण पाकर अंगराज के घर गई।
 
Having woven those divine flowers into her tresses the beautiful Ruchi went to Angraj's house after being invited.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)