श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.44.7 
तान्यगृह्णात् ततो राजन् रुचिर्ललितलोचना।
तदा निमन्त्रकस्तस्या अङ्गेभ्य: क्षिप्रमागमत् ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तब सुन्दर नेत्रों वाली रुचि ने वे पुष्प ले लिए। इसी बीच अंगदेश से उसका फोन आया।
 
King! Then the beautiful-eyed Ruchi took those flowers. In the meantime, she received a call from Angadesh. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)