Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.44.3: कुरुनन्दन! बलवान विपुल सोचने लगा कि गुरुपत्नी-रक्षा और प्रचुर तप के द्वारा मैंने दोनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली है॥3॥ | mahabharat अध्याय 13.44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुरुनन्दन! बलवान विपुल सोचने लगा कि गुरुपत्नी-रक्षा और प्रचुर तप के द्वारा मैंने दोनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली है॥3॥
Kurunandan! Powerful Vipul started thinking that through the actions of his Guru-wife-protection and abundant penance, he had conquered both the worlds. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥