श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.44.27 
लोभमास्थाय योऽस्माकं विषमं कर्तुमुत्सहेत्।
विपुलस्य परे लोके या गतिस्तामवाप्नुयात्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हममें से जो कोई लोभ का आश्रय लेकर बेईमानी करने का साहस करेगा, उसे परलोक में वही दण्ड मिलेगा जो विपुल को मिलने वाला है ॥ 27॥
 
Whoever amongst us dares to commit dishonesty by taking shelter of greed, he will get the same fate which Vipul is going to get in the next world.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)