Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.44.22: यह सुनकर विपुल का मुख उदास हो गया। 'यदि मैं इतनी कठिन तपस्या भी करने जा रहा हूँ, तो भी मेरा भाग्य दुःखमय ही होगा। फिर तपस्या का कठिन कार्य दुःखदायी सिद्ध हुआ॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 13.44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सुनकर विपुल का मुख उदास हो गया। 'यदि मैं इतनी कठिन तपस्या भी करने जा रहा हूँ, तो भी मेरा भाग्य दुःखमय ही होगा। फिर तपस्या का कठिन कार्य दुःखदायी सिद्ध हुआ॥ 22॥
Hearing this, Vipul's face became sad. 'Even if I am going to do such a tough penance, my fate will be miserable. Then the hard work of doing penance proved to be painful.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥