श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.44.16 
सम्प्राप्य तानि प्रीतात्मा गुरोर्वचनकारक:।
तदा जगाम तूर्णं च चम्पां चम्पकमालिनीम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गुरु की आज्ञा मानकर विपुल उन पुष्पों को पाकर अत्यन्त प्रसन्न हुआ और तुरन्त ही चम्पा नगरी की ओर चल पड़ा जो चम्पा वृक्षों से घिरी हुई थी॥ 16॥
 
Obeying the orders of his Guru, Vipul became very happy on receiving those flowers and immediately started towards the city of Champa which was surrounded by Champa trees.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)